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Surat - Harekrushna Village Restaurant / गुजरतीओ की पुरानी परंपरा और स्वादिष्ट भोजन के साथ हमारी लुप्त हो रहीं कुछ कलाएं।


सूरत - हरेकृष्णा विलेज रेस्टोरेंट



गुजरतीओ की पुरानी परंपरा और स्वादिष्ट भोजन के साथ हमारा लुप्त हो रहे कुछ शॉ।


मेरे पेट में दर्द था तो मेरा कोई विचार नहीं था कही बहार घूमने का, वैसे भी आज कल की आबोहवा काफी 
ख़राब है, जो कभी भी बदल जाती है।  पर मेरे दोस्तों ने अचानक से यहां पर जाने का प्लान बनाया और मुझे घसीडते हुए ले गए।






जाते ही दिल जितने वाला उसका एंट्री गेट 



सूरत से शहर से थोड़ी दूर बनाया गया ये रेस्टोरंट गुजरती लोगो की शान है ऐसा हम कह सकते है। खाने में और बाकि सारी सुविधाए हमें पुराने दिनों की याद दिलाती है।  जैसे की वह का पपेट शो, फिर एक नृत्य, और जादूगर। ये सारी चीजे आज के टेक्नोलॉजी और vfx मूवी के जगाए फीकी लगती है जैसे किसीने रेस्टोरेंट के नान की जगाए रोटी रखी हो और ठंडे की बॉटल की जगाए छास रखी हो।


इन सारे शो के बारे में हम आगे बात करेंगे अभी हम इस रेस्टोरेंट की बात करते है। यहाँ की टिकट पर पर्सन ३७५ रुपए है पर ये पुरे पैसे वसूल है, आपको यहां जाने के बाद कही पर भी ऐसा नहीं लगेगा की मैंने पैसे वेस्ट कर दिये। 



बैठने ने के लिए की गई व्यवस्था 



यहां पर बैठ कर हमने ढेर सारी बाते की जिसमें मेरा दोस्त कह रहा था की इस से पहले ऐसी ही एक रेस्टोरेंट दूसरी जगह बनाई गई थी जिसका नाम भथवारी था। पर ये रेट में ज्यादा कॉस्टली थी जिसकी वजह से वहा ज्यादा लोग नहीं जाते थे। और वो आज बंध हो चुकी है।  इस रेस्टोरेंट की एक छोटा सा रेस्टोरंट भी जिसका नाम भी हरेकृष्णा रेस्टोरेंट ही है।  वो रेस्टोरेंट काफी पुराना है और उस रेस्टोरेंट की पॉइंट की बात यह है की वो मिडल क्लास फेमेली रेस्टोरेंट है।  जिसके बारे में हम फिर कभी बात करेगे।



हरेकृष्णा रेस्टोरेंट - सूरत 



जब हमने रात का खाना खाने की जगह पर पहोचे तो मुझे काफी आश्चर्य हुआ की इतने पैसे देने के बावजूद मुझे जमीन पर बैठ कर खाना खाना पड़ेगा। सच में मे काफी हैरान था। पर फिर मैंने वहा लगाए गए गुजराती परंपरा के कुछ फोटो देखे तो में शांत हो गया की ये लोग हमें ऐसा अहसास कराना चाहते है की आप उस समय में थोडा सा जीवन जियो जिस समय में पहले के लोग जीवन  जीते थे। में फिर काफी खुश हुआ यह देख कर।



खाना खाने के लिए बनाईगई जगह। 



पैरो में मोजड़ी, कमर पे लूंधी, छाती पे कुर्ता और सर पे पघडी। ये पुराने पारंपरिक कपडे पहनकर जब वो हमें भोजन पिरसने आये तो पहले मुझे हसी आई पर बाद में जब में छोटा था और मेरे गांव के काफी लोग ऐसे कपडे पहनते थे तो मुझे उसकी याद आ गई। ये सच में कुछ अलग ही अहसास था। रात का समय और छोटे छोटे लेम्प की वजह से हम शहर से सीधे गांव में पहोच गए हो ऐसा लगता था।



वहा का पूरा स्टाफ



ऐसे सभी लोगो ने धीरे धीरे मेरी पूरी खाली थाली को गुजराती वानगीओसे भर दी। खेल कूद के कारण मेरा पेटभी खाली हो चूका था, और थोड़ी देर के लिए तो में भूल ही गया की में बीमार हु, पर में यकीन से कह सकता हु की आपको यहाँ के खाने की कोई भी वानगी नुकसान नहीं करेगी। में काफी खुश हुआ जब उन लोगो ने मुझे दही माटी के बर्तन में जमा हुआ दिया। में इस दही का स्वाद कभी नहीं भूल पाउगा। मैंने वो दही तीन से चार बार लिया। वो बहुत ही स्वादिष्ठ था बस में आपको बता नहीं सकता। काफी सारी वानगी थी खाने में, में एक एक करके आपको बताने बैठा तो शायद बहुत ज्यादा वक्त लगेगा। इस से अच्छा यही है की आप खुद टेस्ट करके आइये।      



मेरे अंकल का लड़का जिसने वहा के वेटर की पघडी पहन के फोटो खिचवाई 



वहा पर बच्चो के लिए खेलने की भी व्यवस्था है और छोटो बच्चो के लिए घोडीयू या पालना उनकी भी सुविधा है। बस मुझे एक बात नहीं पसंद आई की यहाँ पर टूरिस्टों के लिए रातमें रहने की सुविधा ऐ नहीं है। बाकि सबकुछ है मानों आपका बचपन भी है और आपकी जवानी भी। यहाँ पर पपेट शो भी होता है जो रात भर शरू रहता है, मैजिक शो भी होता है, जो मुझे काफी पसंद आया। आपको हसी आयेगी पर मेंने वो शो तीन बार देखा। फिर भी मुझे पता नहीं चला की कबूतर उसने गायब कैसे किया। फिर हमने बैठ के ठेर सारी बाते की जिसमें बचपन की और गांव की बाते ज्यादा थी। 


में बस उतनाही कहुगा की गुजरती लोगो का पेट देखना होतो आप हरेकृष्णा विलेज रेस्टोरेंट में चले जाइये। मन भर जायेगा आपका। धन्यवाद।

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