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Sarmoli / एक हिमालयन गांव के स्थानीय लोग मैराथन, फेसबुक, और खुद का इंस्टाग्राम चैनल चलाते है! मुझे तो ज्यादा ये जानकर आश्चर्य हुआ था की यहां पर नेटवर्क भी आता है।


सरमोली - उत्तराखंड 



वैसे अगर आपने कही जाना होतो सरमोली उत्तराखंड में आया है।  एक हिमालयन गांव के स्थानीय लोग मैराथन, फेसबुक, और खुद का इंस्टाग्राम चैनल चलाते है! मुझे तो ज्यादा ये जानकर आश्चर्य हुआ था की यहां पर नेटवर्क भी आता है।


गांव कुछ बड़े घर में से एक 



मुझे ऑफिस और बाकि के काम में ज्यादा दिल नहीं लगता - लेकिन मेरा मन, मेरा शरीर, और मेरी आत्मा इन पहाड़ो में चलने और खोजाने के लिए बनी है। में काफी दिनों से प्लान कर रहा था की एक बार तो सरमोली जाना है। जब मन बनाही लिया तो फिर किसका इंतजार।


दूरबीन उसके गलेमें लटकता हुआ, गहरे भूरे रंगकी आंखे, काले बाल, पैरो में स्पोर्ट जूते और पांरपरिक कपडे के पीछे बैगपैक लटका हुआ, ऐसी एक लड़की सलहतासे हमसे पहले ऊपर चढ़ गई। भारत में बहुत महिलाओ के विरुद्ध वह लड़की या स्त्री प्यार से चलने को अपने जीवन का हिस्सा बनती है। हमने कोई गाइड नहीं रखी थी पर मेरा कहना है अगर आपको इतहास के बारे में या इस जगह के बारे में अंदर से जानना है तो आपको एक गाइड रखना चाहिए।



मनुस्यारी जील (मैने ये फोटो नेट पर से ली है।)



 वहा के सुबह का नजारा मैंने आज तक देखे सब चीजों सुंदर था, ठंडे पहाड़ो के बीचमें बसे इस गांव की सुबह की बात ही अलग है - बस आंखे सांस लेना भूल गई। ठंडी हवाई मेरे अंदर सांस ले रही थी और में मानो स्वर्ग का अहेसास कर ने लगा था।


हमने सुबह की शरुआत एक टेक्सी पर सवार होकर की थी। हमने थेमारी कुंड के लकीरो पर गाड़ी चलाना शरू की,  दूरसे लग रहा था ये छोटे छोटे गांव उनके चारो तरफ खड़े इन पहाड़ो की हथेली में खेल रहे है।  बर्फ की परतो से ढके पहाड़ो की परते हम आसानी से मुस्कुराके देख सकते थे। तब तक बुरांस नाम के खिलने वाले फूल और बड़े बड़े पेड़ वाले पुराने जंगल को पीछे छोड़ दिया था। और एक शांत पहाड़ी पर रुके वह पर हमने मैगी बनाई, और मैगी खाते वक्त हमें लगा की यह पहाड़ों हमारे साथ ये गर्म मैगी खा रहे है। वो मानो जीवंत लग रहे थे। हम सबने साथ में खाते खाते अपने जीवन के बारे में काफी सारी बाते की बहुत पुराने दोस्तों के साथ।





सुबह का नजारा 



मुझे ये बताते हुए काफी ख़ुशी होती है के हमारे भारत में भी ऐसी कोई जगह मौजूद है। 


 हर साल यहां पर वार्षिक गर्मियों की रस्में होती है और इस रस्म को हिमाल कलसूत्र उत्सव कहा जाता है। जिसमें सरमोली गांव के स्थानीय लोग एक साथ मैराथन दौड़ने के लिए आते है, जिसकी ऊंचाई २० किमी (!गल्प) फिट से ऊपर होती है। इसमें २०१६ में विकिपीडिआ द्वारा आयोजित एक सप्ताह का ध्यान योग और एक डिजिटल कार्यशाला शामिल थे। इस त्यौहार में यात्रियोंको भी दिलसे स्वागत करके शामिल किया गया था। ये दिल जीतलेने वाला त्यौहार था।






मैं काफी सारे गांव में घुमा हू, वहा के लोगो की कठिनाइया को महसूस किया है। जब घर में पानी नहीं आता तो दूर कुंवे में से पानी भरना, घर में खाना बनाने के लिए लकड़ी इकठ्ठा करना। ये सारी बातें काफी सारे हमारे सिनेमा में अच्छे से दिखाई गई है। और यह सारी बाते सच भी होती है। उन लोगो के पास तो फोन में पब्जी गेम खेलने का भी समय नहीं होता है।  और सुबह से शाम अपने काम में गुजरना और साथ में खुश रहना यही जिंदगी है।







पर इस गांव को देख के लग रहा है की अब काफी बदल गया। लोग फोन और फेसबुक पर अपनी स्माइली फोटो उपलोड करना सिख गए है। कभी कबार वो शहरी लोगो जैसा खाना बनाना भी युटुब से सिख लेते है। और वो इसी समय अपने पारंपरिक दुनिया के ज्ञान को बनाई रखके प्रोत्साहित करना भी सिख गए है। वो अपने कुदरती आबोहवा में काफी खुश है और तो और वो अपने पहाड़ी जरणो से बिजली उत्पन भी करते है और इस झरणो का काफी ख्याल भी रखते है। और वो अतिथिओ का काफी ख्याल भी रखते है, उसके प्रति जो आदर और मान देते वो काफी अच्छी बात है।           


वैसे यहां पर एक मंदिर भी आया हुआ है। जिसका नाम नंदादेवी मंदिर जो पंचचूली चोटियों पर आया हुआ है। इस मंदिर का इतिहास आप विकिपीडिआ पर पढ़ सकते है। जो काफी सुंदर है और एक बात कहु तो वहा पर जाने की यात्रा काफी सुंदर है। जिसमें एडवेंचर, मस्ती, और रात को चेन की नींद आ जाए ऐसी थकन है।



 नंदादेवी मंदिर - एक कदम भगवान की और 






यह भारत का खूबसूरत, बर्फीला, और दिल जितने वाला गांव है! (मेरा मानना है। )

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